अम्मा, तुम बिन आँगन सूना लगता है
घर की चौखट और दीवारें वैसी ही हैं,
आँगन में तुलसी की क्यारी वैसी ही है।
बस
तेरे आँचल की छाँव नहीं है
जो दुलराए तेरे जैसा वैसी ठांव नहीं है
तेरे बिन हर कोना सूना लगता है।
अम्मा, तुम बिन आँगन सूना लगता है
पूर्णिमा बाजपेयी त्रिपाठी
मो. 8707225101
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