Saturday, August 29, 2026

 

अम्मा, तुम बिन आँगन सूना लगता है

घर की चौखट और दीवारें वैसी ही हैं,

आँगन में तुलसी की क्यारी वैसी ही है।

 बस तेरे आँचल की छाँव नहीं है

जो दुलराए तेरे जैसा वैसी ठांव नहीं है

तेरे बिन हर कोना सूना लगता है।

अम्मा, तुम बिन आँगन सूना लगता है

पूर्णिमा बाजपेयी त्रिपाठी 

मो. 8707225101

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Kanpur, Uttar Pradesh, India
मै पूर्णिमा बाजपेयी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.