Thursday, March 19, 2026

 सुनो बसंत 

 सुनो बसंत,
 अबकी आए हो
 तो थोड़ा ठहर जाना
 बहुत कुछ कहना सुनना
 खुलकर बतियाना 
 अबकी आए हो, तो 
 सर सर सर सर सर 
 सन सन सन सन
 चलते ही मत रहना
 थोड़ा गात को सहलाना 
 कपोलों को चूमना
 दृगों के ठहराव को 
 हिरनी सी चंचलता देना
 कुछ अनकहा सा 
 बंद है अधरों में 
 प्रस्फुटित कर देना 
 सुनो बसंत,
 अबकी तुम, 
 मेरे मन में पलना 
 आंखों में झरना 
 अधरों से फूटना
 रोम रोम को सिक्त कर
 अपने आगोश में
 लेकर उड़ना 
 चलना थिरकना 
 विश्रांति लेना
 जहां विहंसते नव पल्लव 
और खिलखिलाते तरुवर हो 
जहां रसाल बौराए हो 
जहां महुआ मदमाता हो
पलाश से रक्ताभ 
रुखसार हों 
जहां दुख को सुख में 
बदलने की माया हो
भुला दे जो बैर भाव
ऐसे द्रुमों की छाया हो 
जहां जीवन हो
आशा हो,
उम्मीद हो, 
और परिंदों की तरह
नापने को सारा आकाश हो|

पूर्णिमा बाजपेयी 
8707225101

Monday, March 9, 2026

 

महिला दिवस पर विशेष 

सुनो मैथिली अभी तुम्हारी 

अग्नि परीक्षा बाक़ी है,

इस समाज के अंतर्मन की 

पूर्ण समीक्षा बाक़ी है |

कितना अब भी सह सकती हो,

क्या अभी तितिक्षा बाक़ी है |

कैसे सब अच्छा ही लिख दूँ,

अच्छा दिखने और होने के 

बीच प्रतीक्षा बाक़ी है|


पूर्णिमा बाजपेयी 

8707225101

Friday, March 6, 2026

मत आना बापू

२ अक्टूबर पर बापू को श्रद्धांजलि
कल राजघाट पर
 प्रातः सैर करते करते
कुछ कदम चली,
अचानक एक दुबली पतली 
काया सामने आकर खड़ी हो गई .
मैंने जरा गौर से देखा 
अरे |ये तो बापू है  
मैं हुलास कर आगे बढ़ी
बोली बापू आप यहाँ कैसे ?
मैं गद-गद बापू मलिन,
उदासी और निराशा
 की प्रतिमूर्ति,
दींन  स्वर में बोले
बस अपने नौ निहालों से 
मिलने चला आया .
की थी परिकल्पना
जिस रामराज्य की
उसे देखने चला आया 
तदा ठहर कर, बापू बोले 
सोंचता हूँ कुछ दिन
यहीं ठहर जाऊं 
अपने देश और देशवासिओं में 
हिंसा के खिलाफ 
अहिंसा का मंत्र 
फिर फूंक जाऊं .
फिर रख जाऊं 
रामराज्य की आधार- शिला
फिर से करूँ उदघोष
हिंसा से हमें क्या मिला. 
मैंने कहा बापू 
आज कोई
 किसी की नहीं सुनता 
सिर्फ अपने और 
अपने लिए ही 
हर कोई है 
ताने -बाने बुनता .
मेरी माने तो बापू 
आप वहीँ रहिये 
यहाँ आयेगे तो पछतायेंगे 
सत्कर्तव्य सत्यनिष्ठा
संस्कार स्वभाषा के 
निधन पर आंसू बहाएगे.


पूर्णिमा बाजपेयी 







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Kanpur, Uttar Pradesh, India
मै पूर्णिमा बाजपेयी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.