मखमल के जैसी
ओस में नहाई
सकुचाई शरमाई
सुंदर सा मुखड़ा
वोह एक लड़की .
अलबेली, अनजानी ,
थोड़ी सी पहचानी,
आँखों में सपने है
सपने जो अपने है
कुछ कर गुजरने का
जज्बा भी था उसमें
वोह एक लड़की.
छूने को तारों को
बहती बयारों को
मन में उमंगें थी
तिरती तरंगे थी
.साह्स और छमता का
संगम अनूठा था
वोह एक लड़की .
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