अनन्त आकाश /Anant Aakash
Thursday, March 19, 2026
Monday, March 9, 2026
Friday, March 6, 2026
मत आना बापू
कल राजघाट पर
अरे |ये तो बापू है
मैं हुलास कर आगे बढ़ी
बोली बापू आप यहाँ कैसे ?
मैं गद-गद बापू मलिन,
उदासी और निराशा
की प्रतिमूर्ति,
दींन स्वर में बोले
बस अपने नौ निहालों से
मिलने चला आया .
की थी परिकल्पना
जिस रामराज्य की
उसे देखने चला आया
तदा ठहर कर, बापू बोले
सोंचता हूँ कुछ दिन
यहीं ठहर जाऊं
अपने देश और देशवासिओं में
हिंसा के खिलाफ
अहिंसा का मंत्र
फिर फूंक जाऊं .
फिर रख जाऊं
रामराज्य की आधार- शिला
फिर से करूँ उदघोष
हिंसा से हमें क्या मिला.
मैंने कहा बापू
आज कोई
किसी की नहीं सुनता
सिर्फ अपने और
अपने लिए ही
हर कोई है
ताने -बाने बुनता .
मेरी माने तो बापू
आप वहीँ रहिये
यहाँ आयेगे तो पछतायेंगे
सत्कर्तव्य सत्यनिष्ठा
संस्कार स्वभाषा के
निधन पर आंसू बहाएगे.
पूर्णिमा बाजपेयी
Wednesday, November 12, 2025
उजास
Saturday, August 16, 2025
मां भारती मां सरस्वती
मां भारती मां सरस्वती
हे शारदा हंस वाहिनी,
दे ज्ञान चक्षु बनाओ ज्ञानी
मन क्लेश हरो वरदायिनी।।
वागेश्वरी मति गति सुधारो
चित्रांबरा वीणा को धारो,
कंठ में बसे वेद चारों
करके कृपा हमको उबारो।।
भुवनेश्वरी हे चंद्रकांति
श्वेत कमला धवल वसना
हे विशालाक्षी जी धारो।।
मातु ममता का पिटारा
खोल आशीषों को वारो,
ब्रम्हजाया जगत जननी
भर ज्ञान की अंजुरी वारो।।
महाभागे कमल लोचनि
हर के जड़मति हमको तारो,
सुरपूजिता हे पद्मनिलया
मैं हूं अकिंचन अंश तेरा
कौमुदी,दृष्टि मेरी ओर डारो।।
पूर्णिमा बाजपेयी
8707225101
Thursday, August 7, 2025
हरे कांच की चूड़ियां
आज फिर उसने अपने वार्डरोब से सुंदर,चटकीले हरे रंग की साड़ी निकाली और बहुत ही सुघड़ता से तैयार होकर ड्रेसिंगटेबल के आदमकद शीशे के सामने खड़े होकर खुद को निहारा।अचानक उसकी नज़र अपने सूने हाँथों पर गयी उसने झट से बैंगलबाक्स से सम्हाल कर रखी गयी पुरानी कामदार हरी चूड़ियां निकाल कर पहन लीं। अतीत के तमाम चलचित्र उसकी सजल आंखों में तैर गये। ये उसकी मां की दी हुयी अनुपम और अंतिम सावनी थी जिसे वो साल दर साल जीती है।क्योंकि अब मां-मायका और मन इन्हीं हरी कामदार चूड़ियों में समा गया है।
पूर्णिमा बाजपेयी
109/191ए’ जवाहर
नगर कानपुर
8707225101
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About Me
- पूर्णिमा बाजपेयी
- Kanpur, Uttar Pradesh, India
- मै पूर्णिमा बाजपेयी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.