Monday, March 9, 2026

 

महिला दिवस पर विशेष 

सुनो मैथिली अभी तुम्हारी 

अग्नि परीक्षा बाक़ी है,

इस समाज के अंतर्मन की 

पूर्ण समीक्षा बाक़ी है |

कितना अब भी सह सकती हो,

क्या अभी तितिक्षा बाक़ी है |

कैसे सब अच्छा ही लिख दूँ,

अच्छा दिखने और होने के 

बीच प्रतीक्षा बाक़ी है|

पूर्णिमा बाजपेयी 

8707225101

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Kanpur, Uttar Pradesh, India
मै पूर्णिमा बाजपेयी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.