महिला दिवस पर विशेष
सुनो मैथिली अभी तुम्हारी
अग्नि परीक्षा बाक़ी है,
इस समाज के अंतर्मन की
पूर्ण समीक्षा बाक़ी है |
कितना अब भी सह सकती हो,
क्या अभी तितिक्षा बाक़ी है |
कैसे सब अच्छा ही लिख दूँ,
अच्छा दिखने और होने के
बीच प्रतीक्षा बाक़ी है|
पूर्णिमा बाजपेयी
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