आन बान शान और मान को बढाइये ,
देश हो विदेश दूर देश में भी बैठकर
मातु मातृभाषा मातृभूमि गुण गाईये .
सरल सुग्राह संतोष और सुख दे
बतरस रस घोले ह्रदय में उतारिये
हिंदी भाषा जनभाषा आम भाषा रूप है
ऐसी हिंदी भाषा पे सौ जन्मों को वारिये .
कबीरा ने बीज डाला तुलसी ने पानी दिया
सूरा संग हिंदी धीरे बड़ी हो गयी
भारत के इंदु भारतेंदु का आधार पाय
शैल सुता के समान हिंदी खड़ी हो गयी .
सूरज का ताप और चाँद की शीतलता
दोनों गुण एक हिंदी में ही पाईये
चिरजीवी चिरयुआ देववाणी महावाणी
ऐसी देवनागरी की लिपि अपनाईये.
हीन भावना मिटाओ खुद को बढाओ आगे
ज्ञान और विज्ञान के तर्क समझाइये
आदि गुरु आर्यभट हिंदु में बनाया बिंदु
बिंदु की महत्ता आज हिंदी में समझायिए
हिंदी से हिदुत्वा और हिन्दुस्तान की शान है
आन बान शान और मान को बढाइये.
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सूरज का ताप और चाँद की शीतलता
ReplyDeleteदोनों गुण एक हिंदी में ही पाईये
चिरजीवी चिरयुआ देववाणी महावाणी
ऐसी देवनागरी की लिपि अपनाईये.
अच्छी पंक्तियां हैं