सत्याग्रह के जो गायक
खुली पलक के स्वप्नद्वार से
आकर यूँ बोले मुझसे ,
मैं गाँधी भारत की आत्मा
मेरा अणु - अणु यहाँ व्याप्त है
मेरे सपनो का सत्य सकल
कण - कण यहाँ व्याप्त है .
स्थापित करने को रामराज्य
मैं पुनह एक दिन आऊंगा
संगीनों के साए में भटके
भारत की संवेदना जगाऊंगा .
आजादी के बाद देश की
हालत भी सवरी है ,
विज्ञान - ज्ञान संपन्न हुआ
गौरव - गरिमा भी निखरी है
पर सत्य अहिंसा दया
क्षमा के वादे टूटे है
इंसा के इंसा होने के
नेक इरादे टूटे है
मैं आऊंगा भेद मिटाने
मानवता का पाठ पढ़ाने
सत्याग्रह की अलख जगाने
भारत माँ का दर्द बटाने.
अणु और परमाणु युद्ध
मैं रोक सकूंगा
पुनः कहूँगा राम राम
हे राम| मगर भारत
अक्षुण है, भारत के
क्षय को रोक सकूंगा
ज्ञान और विज्ञान प्रबल हो
यह बिगुल बजाऊंगा
मैं गाँधी भारत की आत्मा
मैं पुनः एक दिन आऊंगा.
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