Friday, April 15, 2022

तन रंग मन रंग  रंग रंग रंग रंग 

तन रंग मन रंग  रंग रंग रंग रंग 

आंगन का हर कोना है,

जीवन के इस सांझ पहर में 

अनुभव का रंग दूना है॥

तन रंग मन रंग

कुछ कच्चे रंग कुछ पक्के रंग

कुछ झूठे रंग कुछ सच्चे रंग,

कुछ शर्माये कुछ घबराये 

कुछ बौराये कुछ अलसाये ।

रंग ही रंग सलोना है॥

तन रंग मन रंग….

सतरंगी सपनों के सतरंग

मुक्त पवन की चाल के हर रंग,

देहरी और दुआर के हर रंग,

छप्पर और पुआल के हर रंग।

रंग ही रंग बिछौना है॥

तन रंग मन रंग….

अम्मा की उम्मीदों का रंग 

बाबू की मेहनत का हर रंग

रंग रंग रंग रंग जीवन को रंग, 

जीव तू एक खिलौना है।

तन रंग मन रंग

पूर्णिमा बाजपेयी त्रिपाठी

109/191 ए, जवाहर नगर कानपुर

8707225101


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मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.