पीछा करते हैं .
वक़्त गुजरता जाता हैं,
पर अहसास की डोरी थामे
भविष्य के उजालों में भूत
के अंधेरों का डर,
मन को कमजोर करता हैं.
रामरती की आहें ,
भोलू काका की मजबूरी ,
चंपा भौजी की व्याकुलता ,
रन्नो की पहाड़ सी जवानी,
नंदू भैया की बेरोजगारी ,
कुछ सुलगते हुए सवाल ?
अधूरे ठन्डे से जवाब.
आम आदमी के जीवन का रहस्य
अनदेखा अनकहा भविष्य
कब पिघलेगा सूनी
आँखों का नीर
कब कटेगा कोहरा
हटेगी पीर .
खाली खाली आँखों में
सजेंगे सुनहरे ख्वाब,
तब बोलेंगे हम होंगे कामयाब .
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यादों के धुंधले साये
ReplyDeleteपीछा करते हैं .
वक़्त गुजरता जाता हैं,
इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....