Monday, January 3, 2022

 

आओ मिलकर दिया जलाएं

 सत्य प्रेम करुणा से पूरित

कर्म और निष्ठा से सिंचित,

आओ मिल एक दिया जलाएं

अंधियारे को दूर भगाएं।

जीवन के झंझावातों में

चलते-चलते राह कंटीली,

उन राहों में पुष्प खिलाएं।

सबकी राहें सुगम बनाएं

आओ मिल एक दिया जलाएं।

एक दिया मां के सपूत को

जिससे जननी जन्मभूमि है,

एक दिया उन देवदूत को ,

लौट के फिर जो घर ना आये

आओ मिल एक दिया जलाएं।

एक दिया उस कर्मवीर को

जो धन-धान्य धरा में भर दे

खेतों में लहराएं बाली,

झूम-झूम कर पौधे फल दें।

अंतस का अंधियार मिटाएं

आओ मिल एक दिया जलाएं।

एक दिया शिक्षा का प्रज्ज्वल

नयी-नयी तकनीकों का बल,

एक दिया समरसता का हो

विश्वगुरू भारत बन जाए

आओ मिल एक दिया जलाएं।

एक दिया मेरे हिस्से का

गैर बराबरी के किस्से का

अब तो करो बराबर भाई,

क्यों तुम अपने औमै पराई

बेटी की पीड़ा चिल्लाई।

अपनेपन का दिया जलाएं

आओ मिल एक दिया जलाएं।

अपने लिये जिया है हर क्षण,

परहित श्वास-श्वास का लेखा

जी लें तो फिर जश्न मनाएं।

विश्व रूप राघव की धरती

आशा जहां कुलाचें भरती,

इस धरती को स्वर्ग बनाएं

आओ मिल एक दिया जलाएं।

 

पूर्णिमा त्रिपाठी

109/191 A

जवाहर नगर कानपुर 208012 

मो. 8707225101

 

 

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मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.