Sunday, July 21, 2024

 काल पर्वत 

फिर काल पर्वत का 

एक शिलाखंड

टूट कर बिखर गया।

कोई,

धीरे से आया

और चुपके से गुज़र गया।

अतीत हो गये हैं,

उसके पावों के निशान।

हम अतीत से 

मुक्त होकर,

आराधना करें वर्तमान की,

जिनका वर्तमान पर ध्यान है

उनका भविष्य भी महान है।

देखते - देखते 

समय रथ ओझल हो जाता है,

और अवसर की प्रतीक्षा में

अवसर

हांथ से निकल जाता है।

हर क्षण महनीय है,

एक अवसर है 

बीज बोने का।

आओ,

हम बीज बोएं 

निर्माण के।

खत्म हो

अंधेरे का वर्चस्व

विहान हो।

और सिर्फ 

सृजन हो,

उत्थान हो,

कल्याण हो॥

पूर्णिमा त्रिपाठी बाजपेयी

109/191ए' जवाहर नगर कानपुर

मो.   8707225101

Monday, February 12, 2024

 नमः वीणा धारिणी

नमः वीणा धारिणी

दुख कलेश निवारिणी,

मेरे सारे पातक हर लो

मेरे मन मंदिर को वर लो॥

मातु तुम्हारी अनुपम गाथा

सुनकर सभी झुकाएं माथा,

मेरी वाणी लेखनी बनो तुम

मेरी बनाओ छवि अनूपम्॥

दे दे मां मुझको तू सहारा

मांगूं तुझसे ज्ञान पिटारा,

विद्द्या की मां हो अधिष्ठात्री

दुर्गा तुम हो तुम्ही हो गायत्री॥


पूर्णिमा त्रिपाठी बाजपेयी

109/191ए, जवाहर नगर कानपुर

मो. 8707225101

Monday, January 15, 2024

 

राम तुम आधार हो

राम तुम आधार हो

राम तुम व्यवहार हो,

तुम अहिल्या की प्रतीक्षा

शबरी के सत्कार हो॥

जिंदगी की हर प्लावन का

राम तुम तटबंध हो,

मन का मन से हो मिलन

तुम वह सुखद अनुबंध हो॥

राम तुम अभिमान हो

उच्चतम प्रतिमान हो,

संस्कारों की बही के

तुम सुखद गुणगान हो॥

कल्पना कह कर तुम्हें

हम दूर कर सकते नहीं,

हम तुम्हारे अंश हैं

तुम हमारे प्राण हो॥

राम तुम अभिमान हो

उच्चतम प्रतिमान हो।।


पूर्णिमा त्रिपाठी बाजपेई

109/164 जवाहर नगर कानपुर

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Kanpur, Uttar Pradesh, India
मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.