Sunday, February 21, 2010

पावन होली के पर्व पर आप सभी को शुभ कामनाएं होली का यह पर्व रंगों का पर्व है जीवन के विविध रंग इसमें समाहित हैं . यह रंग हमें जीने की प्रेरणा देते है अतः आइये  हम सभी मिलकर पूरे विश्व में खुशियों के रंग बिखेरनें  का सार्थक प्रयास करें ताकि पूरे विश्व में बुराइयों की पराजय हो और प्रेम भाईचारा तथा सौहार्द बढे .आज  विश्व  बुरी तरह आतंकवाद की चपेट में है अतः होली का यह पर्व हिंसा की पराजय और अहिंसा की सदैव विजय की ओर इंगित करता है.वर्तमान समय में त्योहारों के भी मायने बदलते जा रहे है हर जगह औपचारिकता ही नजर आ रही है मेल मिलाप के अर्थ ही बदल गए है गिव एंड टेक का जमाना है.पहले हर कोई सद्भावना व प्रेमवश एक दूसरे के घर आता जाता था   पर अब  सुविधा तथा फायदे के आधार पर जाने की कोशिश करते है .

4 comments:

  1. हंस कर जी कर सुमन बन सपने कर आबाद |
    इस सुमन का मोल क्या मुरझाने के बाद ||

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  2. सुन्दर शुरुआत्। चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है।

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  3. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।
    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.