Saturday, June 18, 2016

धरती की आवाज सुनो

धरती की आवाज सुनो
कहे धरा मत छीनो मुझसे
मेरा हार सिंगार सुनो
धरती की आवाज सुनो,
काट – काट कर मेरे तन को
मन को घायल कर डाला
अब तो रहम करो आंचल पर
मेरी करुण पुकार सुनो
धरती की आवाज सुनो,
मेरा मस्तक मेरे बाजू
मेरी कटि जंघा मेरी
अंग – अंग मेरा तेरे हित
हित साधन को कुचल डाला
धरती की आवाज सुनो,
अति उपभोग करोगे तो तुम
क्या सौपोगे नस्लो को
रीता मेरा दामन होगा
आओ जरा विचार करो
धरती की आवाज सुनो,
मेरी हरी – भरी काया को
मत बदरंग बनाओ तुम
बाग – बगीचे पेड लगाओ
धरती मॉ को बचाओ तुम
धरती की आवाज सुनो,
मेरे  आंचल की छाया मे
मिलेगा प्यार – दुलार तुम्हे
युगो – युगो से कह्ती आयी हू
जीवन  का    सार  सुनो
धरती की आवाज सुनो.
पूर्णिमा त्रिपाठी (बाजपेयी)
109/164
जवाहर नगर कानपुर – 208012

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मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.