Sunday, December 28, 2014

हिंदी हमारी शान

हिंदी से हिंदुत्व और हिन्दुस्तां  की आन है 
आन- बान- शान और  मान  को बढ़ाइए ,
देश हो विदेश दूर देश में भी बैठकर 
मातु मातृभाषा मातृभूमि गुण गाईये। 
सरल सुग्राह संतोष और सुख दे 
बतरस रस  घोले हृदय में उताररिये ,
हिंदी भाषा जन  भाषा आम भाषा रूप है
 ऐसी हिंदी भाषा पे सौ जन्मों को वारिये। 
कबीरा ने बीज डाला तुलसी ने पानी दिया 
सूरा संग हिंदी धीरे - धीरे बड़ी हो गयी ,
भारत के इंदु भारतेंदु का आधार पाय 
शैल सुता के समान  हिंदी खड़ी  हो गयी। 
सूरज का ताप  और चाँद की शीतलता 
दोनों गुण  एक हिंदी   में ही  पाइए,   
चिर जीवी चिर युवा  देववाणी महावाणी 
ऐसी देवनागरी की लिपि अपनाईये।
 हीन  भावना मिटाओ खुद को बढ़ाओ आगे 
ज्ञान और विज्ञान  के तर्क समझाइये, 
आदि गुरु आर्यभट्ट हिंदु  में बने थे 
बिंदु की  महत्ता आज हिंदी में  समझाइये। 



पूर्णिमा त्रिपाठी बाजपेई 

Search This Blog

Pages

My Blog List

Followers

About Me

My photo
मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.