Sunday, September 25, 2011

आतंकवाद से

यह जहर न जाने कितनी
बलियां और लेगा?
जाने कितनी माँ बहनों के
हृदय तडपायेगा.
कब तक होता रहेगा 
मानवता का नरसंहार ?
कब तक खंडित रहेगा 
मेरे स्वदेश का यह दुलार  
क्या कभी नहीं हो पायेगा
भाई का भाई से प्यार ?
क्या टुकडो  में बट जायेगी 
कश्मीरी सुषमा की बहार ?
क्यों प्यार बाटते हो सबका 
क्या तनिक भी तुमको क्षोभ नहीं ?
राम रहीम की वाणी क्या थी 
उसका कोई सोच  नहीं .
बंद करो यह भूल भुलैया 
झटको इन तुच्छ विचारों को 
यह सारा भारत अपना है 
मत सोचो देश बाटने को .
आतंकवाद की यह ज्वाला 
जैसे ही बुझ जायेगी 
भाईचारे से हर्षित हो 
यह वसुधा दीप जलायेगी .



पूर्णिमा त्रिपाठी

 

No comments:

Post a Comment

Search This Blog

Pages

My Blog List

Followers

About Me

My photo
मै पूर्णिमा त्रिपाठी मेरा बस इतना सा परिचय है की, मै भावनाओं और संवेदनाओं में जीती हूँ. सामाजिक असमानता और विकृतियाँ मुझे हिला देती हैं. मै अपने देश के लोगों से बहुत प्रेम करती हूँ. और चाहती हूँ की मेरे देश में कोई भी भूखा न सोये.सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले ,और हर बेटी को उसके माँ बाप के आँगन में दुलार मिले.